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आखिर क्यों कॉन्सेप्ट कार के डायरेक्टर पर दर्ज हुआ मुकदमा, वजह जान कर हो जाएंगे हैरान

आकाश शुक्ला, ब्यूरो

हरदोई।कांसेप्ट कार के डायरेक्टर संजीव अग्रवाल की गिनती अभी तक मशहूर उद्योगपति में होती थी लेकिन अब इनकी गिनती हरदोई के सबसे बड़े जालसाजों में की जाएगी क्यो की दिनांक 07/06/2021 को कोतवाली शहर में फर्जीवाड़ा कर फर्जी तरीक़े से ट्रस्ट अध्यक्ष बन कर ट्रस्ट की जमीन बेचने के संबंध में एक एफआईआर संजीव अग्रवाल पुत्र राधेश्याम अग्रवाल व उपनिवन्धक भगवान सिंह पर दर्ज हो चुकी है।

दरअसल वर्ष 1987 में ग्रामसभा नानक गंज ग्रांट में मेन लखनऊ रोड पर ज्ञानयोग धर्मार्थ ट्रस्ट को गरीबो के निशुल्क इलाज हेतु अस्पताल के लिए सरकारी सुरक्षित श्रेणी की जमीन आवंटित की गई थी जिस पर अस्पताल भी कई वर्षों तक संचालित रहा 1987 में ट्रस्ट के अध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल थे उनकी मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र राजीव अग्रवाल ट्रस्ट के अध्यक्ष बने।
वर्ष 2010 में संजीव अग्रवाल की नीयत ट्रस्ट की करोड़ो रूपये की जमीन पर बिगड़ गई।

ट्रस्ट की जमीन को हड़पने के लिए अपनी मां कौशल्या देवी के साथ मिलकर फर्जी ट्रस्ट अध्यक्ष बनकर ट्रस्ट की सुरक्षित श्रेणी की जमीन अपने पुत्र यशवर्धन अग्रवाल व अन्य के नाम बैनामा कर दी व हरदोई सदर तहसील में तत्कालीन तैनात अधिकारियों की मिलीभगत के चलते नियमविरुद्ध ट्रस्ट की जमीन का दाखिल खारिज करवाया व नायब तहसीलदार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सुरक्षित श्रेणी की जमीन की नवैयत बदल दी और खतौनी में ज्ञानयोग धर्माथ ट्रस्ट की जगह यशवर्धन अग्रवाल,सूर्यवर्धन अग्रवाल पुत्र सजीव अग्रवाल,व प्रदीप अग्रवाल पुत्र ज्वाला प्रसाद अग्रवाल का नाम दर्ज कर दिया ।
तत्पश्चात उनके पुत्रो ने गरीबो के अस्पताल को तुड़वा कर अवैध कॉन्सेप्ट कार मारुति शोरूम बनवा दिया।

इस प्रकरण की पहली शिकायत 30/05/2018 को शिकायतकर्ता शरद द्विवेदी द्वारा की गई।भ्रष्टाचार उजागर न हो इस कारण 6/06/2018 को शिकायतकर्ता के ऊपर एफआईआर दर्ज करा दी गई।शिकायतकर्ता लगातार तीन साल तक उच्च स्तरीय शिकायत करता रहा लेकिन कोई भी कार्यवाही सत्ता के दवाब में हरदोई प्रशासन ने नही की बस फर्जी आख्या लगाकर शिकायत का निस्तारण होता रहा और अपने अवैध शोरुम को बचाने के लिए अवैध शोरूम के मालिकान हमेशा सत्ता के साथ रहे।

तत्पश्चात जनहित के मुद्दे को उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कृष्णा कुमार सिंह निवासी हरदोई व अंशु सिंह निवासी लखनऊ ने सोसल मीडिया के माध्यम से मुद्दे को संज्ञान में लिया और शिकायतकर्ता से संपर्क किया
इन दोनों अधिवक्ताओं ने जनहित से जुड़े गंभीर प्रकरण को बगैर किसी पारिश्रमिक शुल्क लिए इन दोनों नवयुवक अधिवक्ता ने लगभग 10 महीने तक इस प्रकरण से जुड़े सभी दस्तबेजो व आदेशो को गहनता से समझा और एक रिट तैयार कर मार्च 2021 में उच्च न्यायालय के समक्ष रखा जिसको कोर्ट ने गम्भीरता से संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए तत्पश्चात दिनांक 07/06/021 को संजीव अग्रवाल व तत्कालीन उपनिवन्धक भगवान सिंह कोतवाली शहर में धारा 419,420,467,468,471 के अंतर्गत केस दर्ज कर दिया गया।

हालांकि इस पूरे भ्रष्टाचार को राजस्व विभाग हरदोई की मिलीभगत से अंजाम दिया गया था लेकिन अभी तक किसी भी राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर कोई भी केस दर्ज नही किया गया है जिससे सिद्ध होता है कि कही न कही ब्यूरोक्रेसी ब्यूरोक्रेसी का बचाव कर रही है हालांकि की पुलिस विभाग की जांच शुरू हो चुकी है अब देखना यह दिलचस्प होगा कि किन बड़े अधिकारियों कक गर्दन कानूनी शिकंजे में फंसती है और सजीव अग्रवाल कब सलाखों के पीछे पहुचता है।

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