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लखीमपुर:सामान्य वर्ग की महिला ने ओबीसी बन कर जीता प्रधानी का चुनाव, देखें वीडियो

आकाश शुक्ला, ब्यूरो

लखीमपुर।जिले की मोहम्मदी तरहसील के दिलावरपुर परगना इलाके में सवाना खातून नाम की महिला ने हालही में हुए प्रधानी चुनावों में हुई सख्ती व कड़े नियमों की पोल खोल दी है।आरोप है कि महिला प्रधान ने ग्राम पंचायत की पिछड़ा वर्ग सीट पर चुनाव के लिए दावे दारी की थी।जबकि महिला सवाना सामान्य जाती से ताल्लुख रखती हैं।

स्थानीय लोगों ने इस कृत्य की लिखित शिकायत भी जिला प्रशासन के जिम्मेदारों से की है, लेकिन अभी तक न ही तो जिलाधिकारी मामले में कोई कार्यवाही की है और न ही सरकार के जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने को तैयार है।हालांकि मामले की सुध लेकर तहसील की एसडीएम व तहसीलदार और लेखपाल ने जाति प्रमाण पत्र निरस्तीकरण का आदेश कर जिलाधिकारी को आख्या प्रेषित कर दी है। लेकिन जिलाधिकारी स्तर तक जाके मामले की जांच पेंडिंग में पड़ी हुई है।ऐसे में इतनी बड़ी लापरवाही व अनियमित्ताएं चुनाव में हुई खुली धांधली की पोल कहने की ओर जरूर इशारा कर रही हैं।

सामान्य से पिछड़ी जनजाति की बनकड प्रधानी जीतने का ये मामला लखीमपुर जिले की मोहम्मदी तहसील के दिलावरपुर परगना का है। एक तरफ सरकार ने निष्पक्ष व साफ ढंग से त्रिस्तरीय चुनाव करवाने के वादे और दावे पेश किये थे।लेकिन कहीं न कहीं जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत से इन दावे और वादों की धज्जियां खुले आम उड़ा दी गईं।आरोप है संबंधित ग्राम पंचायत की सवाना पत्नी मोहम्मद रज़ा बड़ी ही आसानी से एक फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा कर सामान्य वर्ग से पिछड़े वर्ग की बन जाती हैं और चुनाव में दावेदारी कर चुनाव जीत लेती है।इस मामले से जुड़े सभी तथ्य व प्रमाण संबंधित एसडीएम द्वारा किये गए आदेश बयान कर रहे हैं(देखें आदेश की कॉपी)। तो प्रशासन व विकास विभाग की नाक के नीचे इस प्रकार का कृत्य होना कहीं न कहीं जिम्मेदारों की लापरवाही व निष्क्रियता को भी उजागर कर रहा है।वहीं इस पूरे मामला की शिकायत स्थानीय लोगों ने नामांकन के बाद ही कर दी थी।जिससे कि जिम्मेदारों की आंखों में धूल झोंकने वाले पर कार्यवाही की जा सके।लेकिन लम्बा समय बीत जाने के बाद भी जिलाधिकारी द्वारा इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं कि गयी है।शिकायतकर्ताओं ने बताया कि संबंधित तहसील की एसडीएम से लेकर तहसीलदार व लेखपाल तक ने इस मामले की पुष्टि कर जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने को लेकर आख्या प्रेषित कर दी है।लेकिन जिलाधिकारी स्तर पर इस मामले को पेंडिंग में डाल दिया गया है, जोकि जिला प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।मामले की विधिवत जानकारी से शिकायतकर्ताओं ने व आपत्ति कर्ताओं ने अवगत कराया।

ऐसे में इस कृत्य को अंजाम देना सरकार की नीतियों पर तो सवाल खड़ा ही कर रहा है साथ ही इस मामले की जानकारी हो जाने के बाद भी कोई कार्यवाही न होना जिला प्रशासन की गतिविधियों को भी संदिग्ध बना रहा है।

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